वे मानवीय करुणा, जीवन सौंदर्य और संवेदनाओं के शायर थे- प्रो. चौहान
सवांददाता
रतलाम। हिंदी- उर्दू शायरी के बड़े शायर और आम आदमी की भाषा में अपनी बात कहने वाले बशीर बद्र मानवीय करुणा ,जीवन सौंदर्य और संवेदनाओं के शायर थे । उनकी शायरी में आने वाले शब्द मनुष्यता के पक्षधर थे । उन्होंने अपनी सोच और कहने के तरीके से शायरी को समृद्ध किया । उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आम आदमी से लेकर उच्च सदनों तक उनके शेर हमेशा दोहराए जाते रहे। एक रचनाकार के जीवन की यह सबसे बड़ी सफलता होती है कि उसकी रचना आम आदमी की ज़ुबान पर चढ़ जाए । इस लिहाज़ से बशीर बद्र साहब ने लोगों के दिल में अपना स्थान बना लिया था ।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा मरहूम शायर डॉ. बशीर बद्र को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम 'याद-ए-बशीर' में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विद्वान वक्ता प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का मूल्यांकन आने वाला समय स्वयं करता है । बशीर बद्र भी उनकी शायरी के साथ बार-बार जन्म लेते रहेंगे।
जलेसं उर्दू विंग के राज्य संयोजक सिद्दीक़ रतलामी ने बशीर बद्र साहब के रतलाम में मुशायरों के दौरान के संस्मरण सुनते हुए कहा कि वे बहुत नेक दिल इंसान भी थे । जितने बड़े शायर थे उतनी ही आत्मीयता के साथ सबसे संवाद करते थे। उनके शेर उनके इस किरदार की गवाही देते हैं। जनवरी लेखक संघ अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने कहा कि आम इंसान के सामने खड़े हुए संकट को जब कोई रचनाकार अपनी रचना में अभिव्यक्त कर देता है तो वह रचना जन- जन की हो जाती है। बशीर बद्र साहब का हर शेर ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने आम आदमी के बहुत क़रीब जाकर अपनी बात कही है। साहित्य प्रेमी विनोद झालानी ने बशीर बद्र साहब के रतलाम आगमन के दौरान उनसे हुई मुलाकात का ज़िक्र करते हुए उनके शेर प्रस्तुत किए।
युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर ने बशीर बद्र साहब के लिए गए इंटरव्यू की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने भाषा के वापरने का सलीका सिखाया और यह भी समझाया कि हर भाषा का अपना सौंदर्य होता है । उसके शब्दों को वापरने से पहले हर बार सोचना चाहिए। शायर अब्दुल सलाम खोखर ने कहा कि बशीर बद्र साहब के साथ कई बार मंच साझा करने का अवसर मिला और हर बार उनका स्नेह प्राप्त हुआ, यह बहुत सौभाग्य की बात है । आई.एल. पुरोहित ने बशीर बद्र की ग़ज़ल का सस्वर पाठ किया। डॉ.एन. के. शाह ने कहा कि ऐसे रचनाकारों को पढ़ना कुछ न कुछ सिखाता है। पद्माकर पागे ने उनके रतलाम आगमन पर हुए संस्मरण को प्रस्तुत करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
इन्होंने व्यक्त किए विचार
मरहूम शायर के जीवन संस्मरणों का उल्लेख करते हुए उपस्थित सुधिजनों ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ.एन. के .शाह, डॉ. गीता दुबे, ललित चौरड़िया, आशा श्रीवास्तव, रचना चंद्रावत, सुभाष यादव, गीता राठौर, पद्माकर पागे, जितेन्द्र सिंह पथिक , श्याम सुंदर भाटी , अशोक कुमार शर्मा, नरेंद्र कुमार सोलंकी, कीर्ति शर्मा, गौरीशंकर खींची, सलीम पठान, कला डामोर ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए । संचालन सिद्धीक़ रतलामी ने किया एवं आभार अब्दुल सलाम खोखर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर साहित्य प्रेमी मौजूद थे।













