नेत्रदान बना मानवता की प्रेरणा, गोपाल शर्मा ने दो नेत्रहीनों को दी नई रोशनी
सवांददाता
रतलाम। “मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और के जीवन की नई शुरुआत भी हो सकती है”—इस प्रेरणादायक संदेश को साकार करते हुए थावरिया बाजार निवासी स्व. भवरलाल शर्मा के सुपुत्र गोपाल शर्मा के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर समाज के सामने मानवता की एक अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की।
इस पुनीत कार्य हेतु वीरेन्द्र अग्रवाल, प्रीतेश गादिया एवं दिनेश शर्मा द्वारा दिवंगत के पुत्र राजेश शर्मा एवं धर्मेन्द्र भुरू शर्मा सहित परिवारजनों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी गई। प्रेरित होकर परिजनों ने सहर्ष नेत्रदान की अनुमति प्रदान की।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि सहमति मिलते ही रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचित किया गया। उनके मार्गदर्शन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाह एवं भावना खन्ना ने हर्ष पाटीदार के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की।
इस सेवा कार्य में नवनीत मेहता एवं यशवंत पावेचा ने सारथी की भूमिका निभाते हुए अपने वाहन से मेडिकल टीम को दिवंगत के निवास तक लाने एवं पुनः मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नेत्रदान के दौरान ओमप्रकाश अग्रवाल, सुशील मीनू माथुर,यशवंत पावेचा, हेमन्त मूणत, प्रशान्त व्यास,कांतिलाल शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, बृजकिशोर शर्मा, नवीन शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, नितीन शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज शासकीय नेत्र बैंक द्वारा परोपकारी परिवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
प्रेरणादायक संदेश
नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी के अंधकारमय जीवन में उजाले की किरण बनना है। स्व. गोपाल शर्मा के परिजनों द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणा है कि हम सभी भी इस महादान के लिए आगे आएं।
आइए, संकल्प लें—हम भी नेत्रदान करेंगे और किसी के जीवन में रोशनी बनेंगे।

















