शब्द, कला और भाव ही रचनाकार को पूर्णता देते हैं - प्रो. चौहान
सवांददाता
रतलाम। जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित “एक रचनाकार का रचना संसार” श्रृंखला में दिवंगत कवि ललिताशंकर सुरोलिया की कविताओं पर चर्चा हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि शब्दों का सौंदर्य, कला का वैभव और भावों की गहराई ही किसी रचनाकार को पूर्णता प्रदान करती है। उन्होंने जोर दिया कि निरंतर अध्ययन रचनाकार को संपूर्ण बनाता है, किंतु उसे अपनी मौलिकता बनाए रखते हुए दूसरों के प्रभाव से बचना चाहिए।
कार्यक्रम में दुर्गेश सुरोलिया ने अपने पिता के संस्मरण साझा किए और बताया कि वे अपने रचनाकर्म के प्रति अत्यंत ईमानदार थे। श्रीमती कल्पना सुरोलिया और सीमा सुरोलिया ने भी अपने अनुभव व्यक्त किए। शहर के साहित्यप्रेमियों ने सुरोलियाजी की रचनाओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।रचनाएं पढ़ने वाले प्रमुख प्रतिभागी
प्रो. रतन चौहान, डॉ. कैप्टन एन.के. शाह, कल्पना सुरोलिया, सिद्दीक़ रतलामी, सीमा सुरोलिया, पूजा चोपड़ा, डॉ. स्वर्णलता ठन्ना, आई.एल. पुरोहित, नरेंद्र सिंह डोडिया, कीर्ति शर्मा, हीरालाल खराड़ी, दुर्गेश सुरोलिया, श्याम सुंदर भाटी, नानूराम, विनोद झालानी, लक्ष्मण पाठक, पद्माकर पागे, प्रकाश हेमावत, अनीस ख़ान, दिलीप जोशी, मुकेश सोनी, लक्ष्मी राव, गीता राठौर, मांगीलाल नगावत, जवेरीलाल गोयल, एस.के. मिश्रा आदि।
संचालन एवं आभार
संचालन: आशीष दशोत्तर
आभार: रणजीत सिंह राठौरअगला आयोजन
जनवादी लेखक संघ की श्रृंखला के अंतर्गत जून माह के दूसरे रविवार को दिवंगत रचनाकार डॉ. ओमप्रकाश ऐरन की रचनाओं का पाठ और चर्चा होगी। संघ के अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने साहित्यप्रेमियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।




















