शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा कवि प्रदीप की स्मृति में आयोजन
सवांददाता
शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कवि प्रदीप को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे प्रत्येक भारतवासी की रग-रग में बसे हुए हैं। 'ए मेरे वतन के लोगों' जैसे अमर गीतों के माध्यम से उन्होंने देशवासियों को अमूल्य धरोहर दी। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय जब सैनिकों और नागरिकों में निराशा थी, उस ऐतिहासिक गीत ने नया उत्साह और जोश भर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी ने कहा कि कवि प्रदीप देश के गौरव तो थे ही, रतलाम शहर के भी गौरव थे। उनका ननिहाल रतलाम में था और यहां की स्मृतियां उनकी रचनाओं में झलकती हैं। उन्होंने शासन से आग्रह किया कि माणकचौक विद्यालय का नाम कवि प्रदीप के नाम पर रखा जाए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने बताया कि कवि प्रदीप का वास्तविक नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था। सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने उन्हें ‘प्रदीप’ नाम दिया। मुंबई में उन्होंने अपनी प्रतिभा से बॉलीवुड में उच्च स्थान प्राप्त किया। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएं, प्रेम, कर्तव्य और बलिदान की भावनाएं झलकती हैं। “दूर हटो ओ दुनिया वालों, हिंदुस्तान हमारा है” जैसे गीतों पर अंग्रेज़ी शासन ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया, फिर भी उन्होंने लेखन नहीं छोड़ा।
विशेष अतिथि डॉ. गीता दुबे ने कहा कि कवि प्रदीप के गीतों से हम उन्हें सदैव याद रखेंगे और हर वर्ष स्वरांजलि अर्पित करेंगे। रतलामवासियों का सौभाग्य है कि उनके चरण यहां पड़े।
मंच अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि कवि प्रदीप के गीतों ने राष्ट्र के लिए बलिदान की भावना जागृत की। ऐसे महान कवि का स्मरण राष्ट्र सेवा के समान है।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और कवि प्रदीप के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। सरस्वती वंदना बालिकाओं ने प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत स्थानीय साहित्यकारों व शिक्षकों ने किया। संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार नरेंद्र सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया। संस्था ने विद्यालय परिवार को कवि प्रदीप का चित्र भेंट किया।















