आयकर अधिनियम में ऐतिहासिक बदलाव, कानून हुआ सरल और स्पष्ट
सवांददाता
देश की प्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने आयकर अधिनियम 2025 लागू करने की घोषणा की है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इस नए अधिनियम में पुराने जटिल प्रावधानों को हटाकर कानून की भाषा को सरल बनाया गया है, ताकि आम करदाता भी इसे आसानी से समझ सके और पालन कर सके।
रतलाम में आयोजित जागरूकता कार्यशाला में आयकर अधिकारी एस.पी. डागर ने बताया कि 1961 से लागू आयकर अधिनियम में लगातार संशोधनों के कारण यह अत्यधिक जटिल हो गया था। नए अधिनियम में इन जटिलताओं को दूर कर कानून को अधिक व्यवहारिक और उपयोगी बनाया गया है।उन्होंने जानकारी दी कि पुराने अधिनियम की 800 से अधिक धाराओं को घटाकर लगभग 536 कर दिया गया है। साथ ही 1200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण हटाए गए हैं, जिससे कानून का स्वरूप संक्षिप्त और स्पष्ट हो गया है। करदाताओं की सुविधा के लिए आयकर रिटर्न को अपडेट करने की समय-सीमा भी बढ़ाकर चार वर्ष कर दी गई है, जिससे उन्हें त्रुटियों को सुधारने और सही जानकारी देने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
कार्यशाला में कर सलाहकार परिषद के दिलीप पाटनी ने कहा कि पुराने अधिनियम की भाषा और लगातार संशोधनों के कारण करदाताओं व सलाहकारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नए अधिनियम में भाषा को सरल और अप्रचलित प्रावधानों को हटाकर इसे आमजन के लिए अधिक व्यवहारिक बनाया गया है।
इस अवसर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट एसोसिएशन, कर सलाहकार परिषद, संभागीय उद्योग संघ तथा क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आयकर अधिकारी एस.पी. डागर का सम्मान किया गया। संचालन कर निरीक्षक शिंबु कुमावत ने किया और आभार निशांत लोखंडे ने व्यक्त किया।























