भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन
सवांददाता
रतलाम/भोपाल, 22 नवम्बर 2025 – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इसी क्रम में 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में आयोजित मध्यप्रदेश दिवस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 18 नई नीतियां बनाई हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रगति मैदान में मध्यप्रदेश मंडप का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थितमध्यप्रदेश मंडप की विशेषताएं
मंडप को ग्वालियर किला के रूप में तैयार किया गया है।
केंद्र में मुरैना का 64 योगिनी मंदिर दर्शनीय है, जिसे भारतीय संसद भवन के डिजाइन में भी शामिल किया गया था।
मंडप में खजुराहो, सांची स्तूप, भीमबेटका जैसी विश्व धरोहरों के साथ प्रस्तावित धरोहर स्थलों की झलकियां प्रदर्शित की गई हैं।
हस्तशिल्प, हाथकरघा, जी.आई. उत्पाद, ओ.डी.ओ.पी. उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
होलोग्राफिक इमेज के माध्यम से उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जा रही है।
मंडप में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी दर्शाया गया है। रहे ।लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
मेले में मध्यप्रदेश के लोक नृत्य और लोक गायन ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
मटकी लोक नृत्य: महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में घूंघट डाले ढोल की थाप पर नृत्य करती हैं। इसे आड़ा-खड़ा और रजवाड़ी भी कहा जाता है।
पनिहारी लोक नृत्य: महिलाओं के जीवन और पानी के महत्व को दर्शाता है।
बघेली लोक गायन: रीवा, सतना, शहडोल, सीधी, उमरिया आदि जिलों में प्रचलित, जिसे प्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती शीला बरनाठी ने प्रस्तुत किया।मध्यप्रदेश मंडप ने इस बार भी भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दर्शकों का मन मोह लिया है। विरासत, संस्कृति, उद्योग और पर्यटन की झलकियां अभ्युदय मध्यप्रदेश की तस्वीर पेश कर रही हैं। लोक नृत्यों और पारंपरिक कलाओं ने मेले को जीवंत बना दिया है, जिससे मध्यप्रदेश की पहचान 'देश का हृदय प्रदेश' और भी मजबूत हुई है।























