नवरात्रि के पावन पर्व पर वासुकीनाथ बाबा का दिव्य अभिषेक
सवांददाता
रतलाम। चैत्र सुदी पंचमी एवं पावन नवरात्रि के दिव्य संयोग में शिव शक्ति वासुकी धाम, स्नेह नगर (80 फीट रोड) में वासुकीनाथ बाबा का भव्य, अलौकिक एवं आध्यात्मिक अभिषेक हवन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और दिव्य ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। मंत्रों की पवित्र ध्वनि, धूप-दीप की सुगंध और भक्तों की आस्था ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।
इस पुण्य अनुष्ठान का संचालन विद्वान आचार्यों पंडित जगदीशचंद्र शर्मा, पंडित प्रवीण शर्मा एवं पंडित दीपक शर्मा के सान्निध्य में हुआ, जिन्होंने वैदिक विधि-विधान से अभिषेक एवं हवन संपन्न कराया।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान मोतीलाल पिरोदिया रहे। सह-लाभार्थियों में रवि पाटीदार (मनासा खुर्द), समरथ पांचाल, शुभ दशोत्तर, भगवती शंकर रावल, योगेन्द्र सिंह राठौड़, मुकेश पांचाल, कमल राठौड़, शंकरलाल अंजना, दिलीप प्रजापत, अर्पित मेहरा, राजेश सुराणा एवं हेमन्त मूणत सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागी बनकर हवन-पूजन का पुण्य लाभ अर्जित किया।
प्रातः काल में वासुकीनाथ बाबा का अभिषेक दूध, दही, पंचगव्य एवं पवित्र जल से विधिपूर्वक किया गया। धार्मिक मान्यता है कि बाबा के चरणों में अर्पित जल की प्रत्येक बूंद जीवन के समस्त दुःख, रोग, भय और मानसिक अशांति को हरकर श्रद्धालु के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मबल और सकारात्मक परिवर्तन का संचार करती है।
स्नेह नगर विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती चेतना पाटीदार ने बताया कि वासुकीनाथ बाबा की असीम कृपा से यहां प्रतिमाह उजियारी पंचमी एवं प्रत्येक रविवार को विशेष पूजन-अभिषेक आयोजित होता है। इन आयोजनों से अनेकों श्रद्धालुओं ने चमत्कारी अनुभव प्राप्त कर अपने जीवन में सुख, शांति और संतुलन का अनुभव किया है।
भक्तों की गहरी आस्था है कि बाबा के अभिषेक से कालसर्प दोष, पितृ दोष, नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव, पारिवारिक तनाव एवं मानसिक कष्ट स्वतः शांत हो जाते हैं। श्रद्धालु सफेद पुष्प एवं नारियल अर्पित कर तीन परिक्रमा करते हुए अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं, जो बाबा की कृपा से शीघ्र पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, समृद्धि एवं मंगल ऊर्जा का वास होता है।
इस अवसर पर सूखे नारियल को अपने ऊपर से तीन बार उतारकर हवन कुंड में समर्पित करने की विशेष व्यवस्था भी की गई, जिसे नकारात्मक शक्तियों के शमन एवं जीवन में शुभता लाने का प्रभावी आध्यात्मिक उपाय माना जाता है।
यह दिव्य आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि समाज में आस्था, एकता, सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरण का प्रेरक संदेश देकर हर हृदय में विश्वास की नई ज्योति प्रज्वलित कर गया।










































