गौशाला से टीना को हो रही 5 लाख से अधिक वार्षिक आय
सवांददाता
रतलाम जिले की आलोट तहसील के ग्राम खमरिया स्थित राडीवाली माता गौशाला में आधुनिक हाइड्रोपोनिक तकनीक के माध्यम से गायों के लिए पौष्टिक हरा चारा तैयार किया जा रहा है। यह पहल मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित कन्हैया स्वयं सहायता समूह द्वारा की जा रही है।
गौशाला लगभग 2 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित है, जहां करीब 260 गौवंश की देखभाल की जा रही है। गौशाला के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख 47 हजार रुपये का व्यय होता है, जिसमें भूसा व हरा चारा, खल, मजदूरी, हाइड्रोपोनिक यूनिट, बिजली-मोटर तथा दवाई आदि खर्च शामिल हैं।
समूह की सदस्य टीना बामनिया ने बताया कि हाइड्रोपोनिक विधि से चारा उगाने की प्रक्रिया काफी सरल है। इसमें किसानों से खरीदे गए गेहूं को पहले साफ कर एक दिन पानी में भिगोया जाता है, फिर उसे टाट में रखकर अंकुरित किया जाता है। अंकुरित बीजों को प्लास्टिक ट्रे में फैलाकर फॉगर या ड्रिप सिस्टम से नमी दी जाती है। इस तकनीक से कम बीज में अधिक चारा तैयार होता है। छोटी ट्रे में 250 ग्राम बीज से लगभग 2.5 किलो तथा बड़ी ट्रे में 1 किलो अनाज से लगभग 8 किलो हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है।
गौशाला में स्थापित हाइड्रोपोनिक यूनिट पर लगभग 80 हजार रुपये की लागत आई है, जिससे प्रतिदिन करीब 80 किलो हरा चारा तैयार किया जा रहा है। यह चारा गायों के लिए अत्यंत पौष्टिक माना जाता है और इससे पशुओं के स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है।
गौशाला से प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है, जिसमें 21 लाख रुपये शासकीय अनुदान, 2 लाख 80 हजार रुपये गोबर खाद, 1 लाख 10 हजार रुपये जैविक खाद, 2 लाख 60 हजार रुपये दान तथा 70 हजार रुपये मत्स्य पालन से प्राप्त होते हैं। इस प्रकार वार्षिक व्यय घटाने के बाद गौशाला को लगभग 5 लाख 73 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है।
इसके साथ ही यहां युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आलोट महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं गौशाला में आकर जैविक खाद निर्माण और हाइड्रोपोनिक घास उगाने की तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह पहल पशुपालन और गौसंवर्धन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बन रही है।































