रचना में जन संवेदनाओं की आंतरिक धारा प्रवाहित होती है” – प्रो. रतन चौहान
सवांददाता
वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि जब कोई रचनाकार अपनी वैचारिकता को कलात्मक पक्ष के साथ जोड़ता है, तो उसकी रचना न केवल संदेश देती है बल्कि कविता की अनिवार्यताओं को भी पूरा करती है। नंदकिशोर जोशी ‘सलिल’ की रचनाएँ इसी कारण सार्थक हैं, क्योंकि वे अंतर्निहित जन संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं।
यह विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित “एक रचनाकार का रचना संसार” श्रृंखला की दसवीं कड़ी में दिवंगत रचनाकार नंदकिशोर जोशी ‘सलिल’ पर केंद्रित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए गए। प्रो. चौहान ने कहा कि शब्द और अर्थ का सामंजस्य ही किसी रचना को जीवंत बनाता है, और सलिलजी ने इस सामंजस्य को बनाए रखा, इसलिए उनकी रचनाएँ आज भी बार-बार पढ़ी जाती हैं।संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने सलिलजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे ऐसे रचनाकार थे जिन्होंने हर परिस्थिति में अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी। कीर्ति शर्मा ने उनके शिक्षकीय जीवन में प्रस्तुत नाटकों का उल्लेख किया, जबकि आशीष दशोत्तर ने उनके काव्य और कलात्मक पक्ष पर केंद्रित आलेख का पाठ किया।
सलिलजी के पुत्र देवेंद्र जोशी ने कहा कि रचनाकार के जीवन के बाद भी उनकी रचनाओं के माध्यम से उन्हें याद करना जनवादी लेखक संघ का महत्वपूर्ण प्रयास है।
रचना पाठ एवं सम्मान
इस अवसर पर देवेंद्र जोशी का सम्मान किया गया। सलिलजी की रचनाओं का पाठ ओमप्रकाश मिश्र, कीर्ति शर्मा, नरेन्द्र गौड़, प्रणयेश जैन, मांगीलाल नगावत, जितेंद्र सिंह पथिक, हीरालाल खराड़ी, अकरम शेरानी, चरण सिंह जादव, सुभाष यादव, विनोद झालानी, आशा श्रीवास्तव, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, रचना चंद्रावत, डॉ. गीता दुबे, हरिशंकर भटनागर, रणजीत सिंह राठौर, आई.एल. पुरोहित, नरेंद्र सिंह डोडिया, जयश्री पाल, गीता राठौर, प्रकाश हेमावत, कैप्टन एन.के. शाह, देवेंद्र जोशी और एस.के. मिश्रा ने किया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। अगला आयोजन
श्रृंखला की 11वीं कड़ी दिवंगत रचनाकार किशनदास राही पर केंद्रित होगी। यह आयोजन 8 मार्च को शहीद भगतसिंह पुस्तकालय, शहर सराय, रतलाम में होगा, जिसमें उनकी रचनाओं का पाठ और चर्चा की जाएगी। संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने साहित्य प्रेमियों से सहभागिता का आग्रह किया है।
















