रतलाम में विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत जनसुनवाई आयोजित: अधिकारियों ने गंभीरता से सुनीं आमजन की समस्याएं, मौके पर भी किए निराकरण
विशेष संवाददाता, रतलाम
कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया के दिशा-निर्देशों के परिपालन में जिले भर में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई की श्रृंखला में 25 अगस्त को विभिन्न विकेंद्रीकृत केंद्रों पर जनसुनवाई का आयोजन किया गया। प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चले इस आयोजन में वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित होकर नागरिकों की शिकायतें एवं समस्याएं अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुनीं तथा प्राप्त आवेदनों के समयबद्ध निराकरण हेतु त्वरित कार्यवाही शुरू की।
विभिन्न निकायों एवं विकासखंडों में पहुंचे आवेदक
जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए जनसुनवाई का आयोजन जिले के प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों पर किया गया। इसमें नगर पालिक निगम रतलाम क्षेत्र कार्यालय के साथ-साथ रतलाम, जावरा, सैलाना एवं आलोट अनुविभाग कार्यालयों तथा बाजना एवं पिपलौदा विकासखंड कार्यालयों में आमजन की समस्याएं सुनी गईं। संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/SDM), जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) तथा विभिन्न विभागों के मैदानी अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर आवेदकों से संवाद किया।
विभिन्न विभागों से जुड़े मामले आए सामने
दो घंटे चली इस जनसुनवाई के दौरान जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए ग्रामीणों एवं शहरवासियों ने अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन सौंपे। इसमें मुख्य रूप से:
राजस्व विभाग: सीमांकन, नामांतरण और भूमि संबंधी विवाद।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास: विकास कार्यों, आवास योजना और रोजगार संबंधी मामले।
अन्य विभाग: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति (राशन कार्ड), सामाजिक न्याय (पेंशन), स्वास्थ्य सुविधाएं, महिला एवं बाल विकास, स्कूली शिक्षा, कृषि कल्याण तथा विद्युत वितरण कंपनी से जुड़ी समस्याएं।
त्वरित समाधान और पारदर्शी कार्यवाही के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए कई ऐसे प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण कर दिया, जिनमें तत्काल निर्णय संभव था। शेष गंभीर व विभागीय जांच योग्य आवेदनों को जनसुनवाई पोर्टल/पंजी में दर्ज कर संबंधित विभागीय अधिकारियों को निश्चित समय-सीमा में नियमानुसार पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने हेतु प्रेषित किया गया।
अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आवेदन को लंबित न रखा जाए और आवेदकों को उनके प्रकरण पर की जा रही अद्यतन (अपडेटेड) कार्यवाही की सूचना भी अनिवार्य रूप से दी जाए, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।










