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रतलाम में 'सुनें सुनाएं' के 4 वर्ष पूरे, 48वें सोपान के साथ पांचवें वर्ष में प्रवेश
रतलाम। शहर में रचनात्मक माहौल बनाने और लोगों में पठन-पाठन के प्रति रुचि जगाने के उद्देश्य से शुरू किया गया अनूठा आयोजन 'सुनें सुनाएं' अपने सफल चार वर्ष पूरे कर 48वें सोपान के साथ पांचवें वर्ष में प्रवेश कर गया है। जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम ने समयबद्धता और स्व-अनुशासन की एक अनोखी मिसाल पेश की है।
बीते चार वर्षों में इस आयोजन का दिन और समय कभी नहीं बदला। निर्धारित समय पर शुरू होकर समय पर समाप्त होने वाला यह शहर का एकमात्र ऐसा आयोजन बन चुका है, जहां रचना प्रेमी अपनी स्वप्रेरणा से पहुंचते हैं। इन चार सालों में 500 से अधिक लोगों ने अपनी पसंदीदा रचनाओं का वाचन किया है, जबकि 1500 से ज्यादा साहित्य प्रेमी इस पहल से जुड़ चुके हैं।
बिना भूमिका के प्रिय रचनाकारों का पाठ
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई भी अपनी खुद की रचना नहीं पढ़ता, बल्कि अपने प्रिय साहित्यकार की रचना का बिना किसी भूमिका के निर्धारित समय में पाठ करता है।
हालिया सोपान में भव्य शर्मा (हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला'), सांत्वना शुक्ला ('कृष्ण जन्माष्टमी'), दुष्यंत कुमार व्यास ('वह थी झूठी मगर इतनी झूठी न थी'), यू.एल. जायसवाल ('ज़िन्दगी से बड़ी कुछ सज़ा ही नहीं'), नरेन्द्र सिंह डोडिया ('अकेले नहीं होता कुछ भी'), फाल्गुनी दुबे ('लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती'), नूतन मजावदिया ('भामती'), जी.एस. परमार ('प्रकृति में प्रतिबिम्ब का यथार्थ') और लगन शर्मा ('वह बता रहा है') ने बेहतरीन रचना पाठ किया।
आयोजन में प्रो. रतन चौहान, गुस्ताद अंकलेसरिया, ओमप्रकाश मिश्र, डॉ. गायत्री तिवारी, डॉ. प्रदीप सिंह राव, अरविन्द मेहता, आशीष दशोत्तर सहित शहर के अनेक गणमान्य व साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार पांचवें वर्ष में इस पहल को कुछ नए और नवीन रूपों में प्रस्तुत किया जाएगा।#rtmnewstoday #rtm #news #ratlam #ratlamnews #ratlamlocalnews










