‘सुनें सुनाएं’ के 46वें सोपान ने नगर की रचनात्मकता को नई ऊँचाई दी
रतलाम का ‘सुनें सुनाएं’ आयोजन वाकई साहित्यिक संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है। इसकी सबसे खास बात यही है कि इसमें प्रतिभागी अपनी खुद की रचना नहीं पढ़ते, बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना को बिना किसी भूमिका के प्रस्तुत करते हैं। इस बार 46वें सोपान में दस रचनाओं का पाठ हुआ, जिनमें गोपालदास नीरज, बशीर बद्र, पार्वती जोशी और अन्ययह आयोजन समय पर शुरू और समाप्त होता है, जो अनुशासन और गंभीरता को दर्शाता है।
इसमें वरिष्ठ साहित्यकारों से लेकर युवा रचना प्रेमियों तक की मौजूदगी रहती है, जिससे पीढ़ियों के बीच साहित्यिक संवाद बनता है।
आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान , डॉ मुरलीधर चांदनीवाला,राजेंद्र सेन , मोडीराम सोलंकी , रीता दीक्षित , सरिता दशोत्तर ,राधेश्याम शर्मा, हरीश यादव , श्रीराम दिवे, दुष्यंत कुमार व्यास , ललित चौरडिया, छत्रपाल सिंह , सुभाष यादव आई.एल. पुरोहित, विनोद झालानी, आशा श्रीवास्तव, सुशीला कोठारी, पद्माकर पागे, कीर्ति कुमार शर्मा, संजय परसाई सरल , संदीप भारद्वाज, डॉ. गोविंद प्रसाद डबकरा, दीपक डबकरा, अनीस ख़ान , शैलेंद्र सितूत, किरण जैन, मनीष यादव, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर सहित रचना प्रेमी उपस्थित थे।
चार वर्षों की निरंतरता ने इसे शहर की सांस्कृतिक पहचान बना दिया है। रचनाकारों की कृतियां शामिल थीं।'सुनें सुनाएं' का 47 वां सोपान 2 अगस्त को होगा जिसमें दस रचनाकार अपने प्रिय रचनाकार की प्रकृति पर केन्द्रित रचना का पाठ करेंगे। 'सुनें सुनाएं' ने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।





















