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पर्यावरण संरक्षण प्राण संरक्षण के समतुल्य – कैलाश व्यास
रतलाम। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व उप संचालक अभियोजन कैलाश व्यास ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक दायित्व है। प्रकृति का संरक्षण ही मानव जीवन की रक्षा का आधार है। यदि प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो मानव सभ्यता अपने विनाश के कगार पर पहुँच जाएगी।
वे स्थानीय डॉ. के.एन.के. विधि महाविद्यालय में आयोजित पर्यावरण सजगता एवं संरक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुराधा तिवारी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए पर्यावरण जागरूकता को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।अपने उद्बोधन में व्यास ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त वातावरण में जीवन जीना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से ही संभव है।
उन्होंने 1730 में राजस्थान के खेजड़ली गाँव की प्रेरणादायी घटना का उल्लेख किया, जहाँ अमृतादेवी विश्नोई और उनकी तीन पुत्रियों ने वृक्षों की रक्षा हेतु अपने प्राण न्योछावर किए। उनकी शहादत से प्रेरित होकर 84 गाँवों के 363 लोगों ने वृक्षों से चिपककर बलिदान दिया। व्यास ने इसे विश्व इतिहास में पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक बलिदान का अद्वितीय उदाहरण बताया।व्यास ने रतलाम के वरिष्ठ अधिवक्ता वरदीचंद पोरवाल द्वारा दायर जनस्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को मानवाधिकार की श्रेणी में माना है और स्थानीय निकायों को नागरिकों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छ पर्यावरण की रक्षा का प्राथमिक दायित्व सौंपा है।
उन्होंने यूरोप में हाल ही में आई भीषण हीट वेव और उससे हुए आर्थिक नुकसान व हजारों मौतों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में जल संकट और तापमान वृद्धि जैसी चुनौतियाँ गंभीर रूप ले सकती हैं।अंत में उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों से वर्षा ऋतु में कम से कम पाँच-पाँच वृक्ष लगाने और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह संरक्षित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र शर्मा, हरेंद्र प्रताप सिंह, श्रीमती अर्चना धाकड़, श्रीमती कोमल सिंह, श्रीमती रंजू शर्मा, अरविंद गोडाम, भूपेंद्र रामटेकेकर, प्रदीप पाठक, श्रीमती ऋतुबाला व्यास, श्रीमती सपना जैन सहित महाविद्यालय का स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। संचालन श्रीमती अर्चना धाकड़ ने किया और आभार हरेंद्र सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।



















