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रतलाम की नेत्रम संस्था और बड़नगर के गीता भवन न्यास के साझा प्रयासों से शहर में तीन और नेत्रदान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए।
रतलाम। रतलाम की नेत्रम संस्था और बड़नगर के गीता भवन न्यास के साझा प्रयासों से शहर में तीन और नेत्रदान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए। डॉ. जी.एल. ददरवाल द्वारा 1001 नेत्रदान कराने की ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच हुए इन तीन नेत्रदानों से अब छह दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद जागी है।
तीन अलग-अलग परिवारों ने अपने स्वजनों के असमायिक निधन के दुखद क्षणों में संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्व का परिचय देते हुए यह पुनीत निर्णय लिया:
कपिल मूणत (टाटा नगर): स्व. कन्हैयालाल मूणत के पुत्र कपिल मूणत के निधन पर भाई कमल मूणत व परिजनों ने प्रितेश गादिया, अर्पित गांधी और अर्पित बाफना की प्रेरणा से नेत्रदान की सहमति दी।
सुनील जैन एडवोकेट (राजीव नगर/कस्तूरबा नगर): स्व. ईश्वरचन्द्र जैन के पुत्र सुनील जैन के निधन पर सुशील ‘मीनू’ माथुर, संचित गुप्ता व सुनील पारीख एडवोकेट की प्रेरणा से पत्नी विपुला जैन, भाई दिलीप जैन, पुत्र पदमेश जैन और पुत्री पुलकित जैन (तहसीलदार) सहित परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लिया।
रेशम कुँवर देवड़ा (ग्राम अमलेटा): श्रीमती देवड़ा के असमायिक निधन पर उनके पुत्र राजेन्द्र सिंह देवड़ा, चन्द्रसिंह देवड़ा व परिजनों ने आगे आकर नेत्रदान की स्वीकृति दी।
गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी.एल. ददरवाल ने मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से तीनों नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई। इसके साथ ही डॉ. ददरवाल के मार्गदर्शन में सम्पन्न 1001 नेत्रदान का आंकड़ा पूरा होना क्षेत्र में मानवता और सेवा कार्य का एक बड़ा पड़ाव बन गया है।
प्रक्रिया के दौरान शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास द्वारा दानदाता परिवारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। संस्था के हेमन्त मूणत ने कहा, "नेत्रदान ऐसा पुनीत कार्य है जिससे जाने के बाद भी व्यक्ति की आँखें किसी का जीवन रोशन कर सकती हैं।" उन्होंने आमजन से मृत्यु के बाद जीवन में उजियारा लाने के लिए नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की।










