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श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी की कक्षा तीसरी की छात्रारतलाम की आर्या पाटीदार ने राष्ट्रीय मंच पर लहराया परचम, पाया तृतीय स्थान
इंदौर / रतलाम।
संस्कृति, कला और परंपरा के संगम स्थल इंदौर के प्रतिष्ठित आनंद मोहन माथुर सभागृह (विजय नगर) में आयोजित अखिल नटराज अमृतम सांस्कृतिक संघ (अनास इंडिया) के प्रतिष्ठित 'ऑल इंडिया 23वें कल्चरल नेशनल डांस कॉन्टेस्ट एंड फेस्टिवल' (मालवा नृत्य महोत्सव) में रतलाम की नन्हीं और होनहार नृत्यांगना आर्या पाटीदार ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया है। देश भर से आए सैकड़ों मंझे हुए और प्रतिभावान कलाकारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौरान आर्या ने शास्त्रीय नृत्य विधा (कथक) में अपने भाव, ताल और तकनीकी शुद्धता से निर्णायकों को मंत्रमुग्ध करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय पुरस्कार हासिल किया।
आर्या पाटीदार की यह उपलब्धि केवल रतलाम शहर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मालवा अंचल के लिए गर्व और हर्ष का विषय बन गई है।
ऑनलाइन शिक्षा और कठोर साधना का अनूठा उदाहरण
आर्या पाटीदार की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे एक अत्यंत प्रेरणादायी कहानी छिपी है। वर्तमान दौर में जहाँ शास्त्रीय कलाओं को सीखने के लिए भौतिक रूप से गुरु के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य माना जाता है, वहीं आर्या ने अपनी गुरु दीपा शर्मा के मार्गदर्शन में डिजिटल माध्यम (ऑनलाइन क्लास) से नृत्य की कठिन बारीकियों को सीखा है।
रतलाम के सिद्धिविनायक एक्सटेंशन निवासी धर्मेंद्र पाटीदार एवं रुचि पाटीदार की सुपुत्री आर्या पाटीदार, श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी में कक्षा तीसरी की छात्रा हैं। उन्होंने किसी बड़े महानगर में स्थित संस्थान में जाने के बजाय घर पर ही रहकर स्क्रीन के जरिए अपनी साधना जारी रखी।
उनकी गुरु दीपा शर्मा ने डिजिटल दूरियों को आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने आर्या के लय, ताल, हस्तमुद्राओं, पदचाप (तत्कार) और भाव-भंगिमाओं पर व्यक्तिगत स्तर पर कड़ा अभ्यास कराया। मंच कोई भी हो या प्रतियोगिता कितनी भी बड़ी, गुरु दीपा शर्मा की सूक्ष्म दृष्टि हर एक विद्यार्थी की तकनीकी शुद्धता और प्रस्तुति को निखारने में सदैव तत्पर रहती है। गुरु के इसी अनथक परिश्रम और आर्या की अटूट लगन का प्रतिफल है कि उसने राष्ट्रीय स्तर की इस विशाल प्रतियोगिता में यह मुकाम हासिल किया।
प्रतिस्पर्धा का स्तर और भव्य आयोजन
अखिल नटराज अमृतम सांस्कृतिक संघ (अनास इंडिया) द्वारा आयोजित 23वां कल्चरल नेशनल डांस कॉन्टेस्ट देश की अग्रणी नृत्य प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है। इस वर्ष भी मालवा नृत्य महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस स्पर्धा में देश के विभिन्न राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल—से आए सैकड़ों प्रतिष्ठित शास्त्रीय एवं लोक नृत्य कलाकारों ने भाग लिया।
महोत्सव के दौरान आनंद मोहन माथुर सभागृह में तीन दिनों तक भारतीय सांस्कृतिक रंगों की अनूठी छटा बिखरी रही। ऐसे कड़े और प्रतिस्पर्धी माहौल में कक्षा तीसरी की छात्रा आर्या पाटीदार का कथक नृत्य में तृतीय स्थान प्राप्त करना उनकी अद्भुत लयबद्धता और समर्पण को दर्शाता है।
सफलता का श्रेय: गुरु की निष्ठा और माता-पिता का संबल
अपनी इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नन्हीं नृत्यांगना आर्या पाटीदार ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी गुरु दीपा शर्मा के कुशल मार्गदर्शन, उनकी लगन तथा अपने माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन व सहयोग को दिया।
आर्या ने कहा:
"गुरुजी ने मुझे हर कदम पर सही मार्गदर्शन दिया। ऑनलाइन क्लास होने के बावजूद उन्होंने मेरी छोटी-से-छोटी गलती पर ध्यान दिया और मुझे बेहतर बनाने का प्रयास किया। माता-पिता ने भी मेरे अभ्यास के लिए हमेशा अनुकूल माहौल बनाया।"
वहीं, गुरु दीपा शर्मा ने आर्या की लगन की सराहना करते हुए कहा कि आर्या के अंदर सीखने की तीव्र इच्छा और अनुशासन है। ऑनलाइन माध्यम से शास्त्रीय नृत्य जैसी कठिन विधा को इतनी बारीकी से सीखना और राष्ट्रीय मंच पर सटीक प्रस्तुति देना आर्या की कड़ी मेहनत का परिणाम है।
कला प्रेमियों और नगरवासियों में हर्ष की लहर
राष्ट्रीय स्तर पर रतलाम का नाम रोशन करने पर आर्या पाटीदार एवं उनकी गुरु दीपा शर्मा को चारों ओर से बधाइयां मिल रही हैं। रतलाम के कला प्रेमियों, सामाजिक संगठनों, विद्यालय परिवार तथा परिजनों व शुभचिंतकों ने आर्या के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए गुरु-शिष्या की इस सफल जोड़ी को बधाई दी है।
शिक्षाविदों और कला क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आर्या पाटीदार की यह सफलता आज के नए दौर के बच्चों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि यदि लगन, अनुशासन और सही गुरु का मार्गदर्शन मिले, तो तकनीक (ऑनलाइन माध्यम) की मदद से भी सफलता के सबसे ऊंचे शिखरों को छुआ जा सकता है।













