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पर्यावरण संरक्षण के लिए देहदान उत्तम उपाय: गोविंद काकानी
वैश्य महासम्मेलन एवं रोटरी क्लब सोनकच्छ के संयुक्त तत्वावधान में नेत्रदान एवं देहदान जागरूकता अभियान के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक डॉ. राजेश सोनकर, विशेष अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्रुति बघेल, मुख्य वक्ता देहदान जागरूकता कार्यकर्ता गोविंद काकानी, नेत्रदान प्रेरक श्रीमती उमा झवर, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस मेहता एवं कार्यक्रम प्रभारी सत्यनारायण लाठी ने दीप प्रज्वलित एवं माता रानी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में सत्यनारायण लाठी ने कहा कि नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए सभी एकत्रित हुए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से प्राप्त जानकारी के माध्यम से भविष्य में सोनकच्छ क्षेत्र से इन सभी सेवा प्रकल्पों में सराहनीय योगदान प्राप्त होगा।
रतलाम विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी गोविंद काकानी ने मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में देहदान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देहदान केवल चिकित्सा शिक्षा में योगदान नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। दाह संस्कार में लकड़ी के उपयोग से बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई होती है। यदि लोग देहदान का संकल्प लें तो पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
काकानी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने ऑक्सीजन के महत्व को महसूस किया। ऐसे में हमें यह विचार करना चाहिए कि पर्यावरण को बचाने के लिए हम अपने स्तर पर क्या योगदान दे सकते हैं। देहदान चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन एवं शोध के लिए उपयोगी होने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का भी एक श्रेष्ठ माध्यम है।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में देहदान के बाद शरीर का उपयोग विद्यार्थियों के अध्ययन एवं प्रैक्टिकल प्रशिक्षण में किया जाता है। अध्ययन पूर्ण होने के बाद शरीर की हड्डियों को धोकर सेट के रूप में सुरक्षित रखा जाता है, जो आगे विद्यार्थियों के अध्ययन में उपयोगी होते हैं। शेष अवशेषों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इंसीनरेटर में अग्नि को समर्पित कर दिया जाता है। देहदान के बाद परिवारजनों को अस्थि विसर्जन के लिए बाल एवं नाखून (जिसे अस्थि में गिना जाता है) भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
नेत्रदान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों पर काकानी ने कहा कि कई लोगों के मन में यह धारणा है कि नेत्रदान करने से अगले जन्म में व्यक्ति अंधा पैदा होगा। उन्होंने सहज उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ऐसा होता तो देहदान करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में बिना शरीर के पैदा होता। उन्होंने लोगों से वैज्ञानिक तथ्यों को समझ कर नेत्रदान एवं देहदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।
नेत्रदान के संबंध में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस मेहता ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी। एम के इंटरनेशनल इंदौर की डायरेक्टर श्रीमती उमा झवर ने प्रोजेक्टर के माध्यम से कॉर्निया के उपयोग एवं नेत्रदान से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राप्त कॉर्निया का जरूरतमंद लोगों के जीवन में किस प्रकार उपयोग किया जाता है।
विशेष अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्रुति बघेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए ऐसी कार्यशालाओं को समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए उपयोगी बताया।
मुख्य अतिथि विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने लगभग दो घंटे चले कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं के विचार सुने। उन्होंने सोनकच्छ क्षेत्र में नेत्र प्रत्यारोपण की दिशा में योजना बनाने का आश्वासन दिया। साथ ही देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में पूर्ण सहयोग तथा शासन की ओर से देहदानकर्ताओं के परिवार को मिलने वाले गार्ड ऑफ ऑनर एवं प्रशस्ति पत्र आदि की प्रक्रिया में सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. सोनकर ने दोनों आयोजक संस्थाओं के प्रमुख कार्यकर्ताओं हुकुमचंद अग्रवाल, सुरेशचंद्र मुंदड़ा, रोटेरियन महेशचंद्र राठौर, दिनेश राठौर, संजय सेठी, जीवन सिंह गुर्जर एवं कार्यक्रम प्रभारी सत्यनारायण लाठी का हृदय से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विभिन्न समाजों, संगठनों एवं संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।
कार्यक्रम के समापन पर राजेंद्र कुमार पिता सूरजमल जाजू ने देहदान का फॉर्म भरकर विधायक डॉ. राजेश सोनकर के माध्यम से मुख्य वक्ता गोविंद काकानी को सौंपा। यह सोनकच्छ क्षेत्र में देहदान जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही।













