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श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा—परिवार के मोह में उलझकर मनुष्य पुनर्जन्म और पुनर्मरण के चक्र में फंसता है
स्वामी ज्ञानानंद मार्ग, सैलाना बस स्टैंड स्थित श्री अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित दिव्य चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत रविवार को प्रातःकाल कठोपनिषद का स्वाध्याय एवं सायंकाल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्री श्री 1008 विशोकानंद जी भारती के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
श्रीमद्भागवत कथा एवं प्रवचन में स्वामी विशोकानंद जी भारती ने कहा कि मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य अपनी आत्मा को परमात्मा में लीन करना है। यदि मनुष्य ने 60 वर्ष की आयु प्राप्त कर धर्म, अर्थ और काम के पुरुषार्थों में पूर्णता प्राप्त कर ली है तो उसे अब मोक्ष की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार के मोह में अत्यधिक उलझे रहने से मनुष्य पुनर्जन्म और पुनर्मरण के चक्र में फंसा रहता है।
उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए मनुष्य को अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य को नहीं भूलना चाहिए। मोक्ष की प्राप्ति के लिए आत्मचिंतन, अध्यात्म और परमात्मा की ओर उन्मुख होना आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में वैराग्य, आत्मज्ञान और साधना के महत्व #rtmnewstoday #rtm #news #ratlam #ratlamnews #ratlamlocalnews










