रतलाम में एक पुरुष और दो महिलाओं ने लिया देहदान का संकल्प, मेडिकल छात्रों को मिलेगा अध्ययन का संबल
रतलाम: जीवन के अंतिम पड़ाव के बाद भी चिकित्सा क्षेत्र और समाजसेवा में अपना योगदान देने के उद्देश्य से रतलाम जिले के एक पुरुष एवं दो महिलाओं ने देहदान का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। इस अनुकरणीय निर्णय से शासकीय मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने में मदद मिलेगी।
पूर्व संभागीय अंगदान-प्रत्यारोपण प्राधिकरण समिति सदस्य एवं काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी ने बताया कि तीनों संकल्पकर्ताओं को इस पुनित कार्य में उनके परिवारजनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है।
इन दानवीरों ने लिया संकल्प:
श्रीमती इंदु पारख (निवासी: कोठारीवास, रतलाम) — सहयोगी: पुत्री प्रीति जैन, पुत्र ऋषभ पारख, पुत्रवधू निधि पारख एवं समाजसेवी सुरेंद्र जोशी।
श्रीमती राजाबाई मोगरा (निवासी: महालक्ष्मी नगर, रतलाम) — सहयोगी: पुत्र महेश कुमार मोगरा, पुत्रवधू सुनीता मोगरा एवं पौत्री आराध्या मोगरा।
श्री यशपाल शर्मा (निवासी: ताल, जिला रतलाम) — सहयोगी: पिता मोहनलाल शर्मा, माता राजबाई शर्मा एवं बहन मनीषा शर्मा।
प्रक्रिया पूर्ण, पहचान-पत्र प्रदान किए गए
सभी कागजी औपचारिकताओं के उपरांत मानव संरचना विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंगरौले द्वारा देहदान पहचान-पत्र (आइडेंटिटी कार्ड) तैयार किए गए। डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा के हाथों संकल्पकर्ताओं व उनके परिजनों को ये पहचान-पत्र प्रदान किए गए।
समाज और पर्यावरण को बहुआयामी लाभ
गोविंद काकानी ने देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देहदान से मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की जटिल संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजाला आता है और त्वचा दान से गंभीर रूप से जले या पीड़ित मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देहदान से अंतिम संस्कार में लगने वाली लकड़ी की बचत होती है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।









