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रतलाम मंडल के रेलवे परिसरों में पेयजल गुणवत्ता की नियमित जांच एक माह में 152 बैक्टीरियोलॉजिकल सैंपल एवं 2800 रेसिडुअल क्लोरीन टेस्ट किए गए
रतलाम, 22 सितंबर। यात्रियों एवं रेल कर्मचारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित
पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के चिकित्सा
विभाग द्वारा रेलवे परिसरों में पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच एवं
निगरानी की जा रही है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी श्री मुकेश कुमार द्वारा
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एक माह की अवधि में मंडल में 152
बैक्टीरियोलॉजिकल सैंपल की जांच की गई, जिनमें 99.5 प्रतिशत से अधिक
सैंपल फिट पाए गए। इसी अवधि में पेयजल में अवशेष क्लोरीन की मात्रा की
जांच के लिए 2800 टेस्ट किए गए, जिनमें 99.5 प्रतिशत से अधिक परिणाम
संतोषजनक पाए गए।
यह जांच कार्यक्रम मंडल चिकित्सालय, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय सहित
रतलाम, उज्जैन, इंदौर, चित्तौड़गढ़, नीमच, मंदसौर, देवास, दाहोद, सीहोर,
शुजालपुर, मक्सी एवं डॉ. अम्बेडकर नगर एवं छोटे स्टेशनों सहित विभिन्न
रेलवे परिसरों में नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत
वाटर कूलरों, वॉटर टैप एवं अन्य पेयजल प्वाइंट्स से पानी के नमूने लिए
जाते हैं। इसके साथ ही विभिन्न स्टॉलों पर उपलब्ध पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर
की भी जांच की जा रही है।
बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के माध्यम से पेयजल में संभावित हानिकारक
सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति की जांच की जाती है, जबकि अवशेष क्लोरीन की
जांच से पेयजल में आवश्यक क्लोरीन स्तर की निगरानी की जाती है। जांच के
दौरान पेयजल स्रोतों के साथ-साथ वाटर कूलरों, पानी की टंकियों,
पाइपलाइनों एवं अन्य संबंधित व्यवस्थाओं की स्वच्छता और रखरखाव पर भी
विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यदि किसी स्थान से प्राप्त सैंपल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया
जाता है, तो संबंधित विभाग को तत्काल सूचित कर आवश्यक सुधारात्मक
कार्रवाई की जाती है। इसके बाद संबंधित पेयजल स्रोत की पुनः जांच कर
गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।
रतलाम मंडल द्वारा नियमित सैंपलिंग, टेस्टिंग एवं निरीक्षण के माध्यम से
पेयजल की गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखी जा रही है। इसका उद्देश्य रेलवे
परिसरों में यात्रियों एवं रेल कर्मचारियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं
गुणवत्तापूर्ण पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।










