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शरद पूर्णिमा पर 36 ब्राह्मण उपजातियों का संयुक्त गरबा रास लगभग 700 मातृशक्ति ने भाग लिया एवं पूजा आयोजन
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 36 ब्राह्मण उपजातियों के समाजजनों ने संयुक्त रूप से गरबा रास, धार्मिक पूजा एवं सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि समाज की एकता, संस्कार, संस्कृति और आपसी भाईचारे को मजबूत करना रहा। शरद पूर्णिमा को कोजागरी/रास पूर्णिमा भी कहा जाता है; इस दिन लक्ष्मी पूजन, चंद्र पूजन, खीर का भोग तथा रात्रि जागरण की पारंपरिक परंपरा रही है उसको ही पुनः स्थापित करने के लिए आयोजन किया गया
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना अतिथि गण श्री प्रदीप उपाध्याय भाजपा जिलाध्यक्ष,श्री बी एल पुरोहित,डा संजय पांडे,श्री राजेश व्यास,श्री राकेश शर्मा अध्यक्ष बार एसोसिएशन, डा मंगलेश्वरी जोशी (प्राचार्य), श्रीमती मनीषा शर्मा निगम अध्यक्ष के कर कमलों से हुआ इसके बाद कक्षा 6 की बालिका सुश्री कु. सौम्या पनहालकर वन्दे मातरम् गीत की अनुपम प्रस्तुति ने माहौल को देश भक्ति पूर्ण बना दिया इसके बाद समाज की महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने शरद शरद पूर्णिमा की चांदनी में गरबा रास प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा से भर उठा।
आयोजन में वरिष्ठ समाजजनों ने कहा कि शरद पूर्णिमा केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, आत्म-अनुशासन और संस्कारों को जीवन में उतारने का अवसर है। ब्राह्मण समाज को संस्कार, चिंतन और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से आगे बढ़ने पर बल दिया गया। है
बच्चों और युवाओं को पारंपरिक गरबा, रास, भजन एवं पूजा-विधि से जोड़ा गया।
नई पीढ़ी को समाज की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मूल्यों से परिचित कराया गया।
उत्सव के माध्यम से अनुशासन, सेवा, आदर और सामूहिक भावना का संदेश दिया गया।
36 ब्राह्मण उपजातियों के समाजजन एक मंच पर आकर आपसी निकटता, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देने लगे। ऐसे सामूहिक उत्सवों से उपजातियों के बीच की दूरियां घटती हैं और समाज एक परिवार की तरह जुड़ता है।
समाज में सांस्कृतिक जोड़: गरबा रास और पूजा से परंपराएं अगली पीढ़ी तक पहुंचती हैं।
36 उपजातियों का सहभाग आपसी समझ और संगठन को मजबूत करता है।
पारिवारिक संस्कार: बच्चे-युवा धर्म, संस्कार और सामूहिक आचरण सीखते हैं।
आपसी सहयोग: उत्सव में मिलने से रिश्ते बनते हैं, सहयोग बढ़ता है और समस्याओं पर साझा चर्चा होती है।
युवाओं की भागीदारी: युवा समाज-सेवा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगठन से जुड़ने का अवसर पाते हैं।
महिला सशक्तिकरण: महिला मंडल की भागीदारी से आयोजन अधिक सक्रिय और संगठित होताउत्सव का संदेश
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित समाजजनों ने शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं और संकल्प लिया कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होंगे, ताकि ब्राह्मण समाज की संस्कृति, शिक्षा, संस्कार एवं एकता लगातार विकसित हो। श्री संदीप व्यास ने बताया कि यह आयोजन केवल गरबा और पूजा नहीं था; यह 36 ब्राह्मण उपजातियों के बीच संस्कृति का सेतु, संस्कारों का संदेश और आपसी रिश्तों का उत्सव था अतिथियों का स्वागत श्री संजय दवे , कपिल व्यास ,सुनील दुबे ,संदीप व्यास , श्रीमती रजनी व्यास , मीनाक्षी रावल आदि ने किया ब्राह्मण समाज के सभी उपजाति के पदाधिकारी गण उपस्थित थे
अंत में प्रसादी का वितरण श्री सत्येंद्र जोशी ,विजय हेमकांत शर्मा ,राजेंद्र जोशी ,नितिन तारे , अभ्यंकर,कैलाश शर्मा के द्वारा किया गया संचालन श्री अजय जोशी ने किया













