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साहित्य की समृद्ध विरासत समाज को जोड़ती है- प्रो. चौहान जनवादी लेखक संघ का आयोजन
रतलाम । हमारे साहित्य की विरासत बहुत समृद्ध है । इसमें विभिन्न भाषाओं में कही गई रचनाओं ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । हर भाषा का अपना सौंदर्य है और अपनी एक शैली । साहित्य हमें हर भाषा के क़रीब जाने और उसकी हर विधा को सीखने की समझा देता है । यही समझ इस पूरे समाज को एक सूत्र में बांधती है ।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा आयोजित तरही नशिस्त के चौथे सोपान की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएं हमें एक सूत्र में बांधती हैं । साहित्य में आने वाले नए रचनाकारों को हर भाषा के साहित्य को पढ़ना और समझना आवश्यक है । ऐसा करने से समझ विकसित होती है।
जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रंगकर्मी यूसुफ़ जावेदी ने कहा कि साहित्य में हमारे सामान्य जीवन के शब्दों का समावेश होना ज़रूरी है। आम आदमी जिन शब्दों का इस्तेमाल करता है, जिन्हें समझता है, वे शब्द अगर साहित्य की गरिमा के अनुसार हमारी रचनाओं में शामिल होंगे तो हमारी रचनाएं हर पाठक को अपनी ओर आकर्षित करेगी । समाज में हर तरह के लोग होते हैं। एक रचनाकार को यह तय करना होता है कि वह किसके पक्ष में खड़ा है और अपनी रचना के ज़रिए किसकी पीड़ा को अभिव्यक्त कर रहा है।
शायर सिद्दीक़ रतलामी ने संचालन करते हुए कहा कि उर्दू और हिंदी ग़ज़ल का अपना समृद्ध इतिहास है । हम किसी भी भाषा में अपनी रचना करें मगर उसके माध्यम से क्या कह रहे हैं, इसका ध्यान रखना ज़रूरी है। हमारी रचना तभी प्रभावी बन पाएगी।
इनकी सहभागिता रही
नशिस्त में वरिष्ठ साहित्यकार रतन चौहान, यूसुफ़ जावेदी, सिद्दीक रतलामी, डॉ फ़रीद शेख, अमीरूद्दीन अमीर, आशीष दशोत्तर, विनोद झालानी, आई.एल. पुरोहित, आशा उपाध्याय, प्रतिभा पांडे, पुष्पलता शर्मा, दिनेश उपाध्याय, दुष्यंत कुमार व्यास, कीर्ति शर्मा, यू .एल. जायसवाल, हरिशंकर भटनागर, मांगीलाल नगावत, श्याम सुंदर भाटी, डॉ तौफीक़, अब्दुल सलाम खोकर, निसार पठान, जीएस खींची, वाहिद रतलामी, शरीफ़ क़ामिल, सी. एल. शरषित , कविता सोलंकी, भागीरथ कछवाय, कला डामोर की सहभागिता रही।
अगली नशिस्त 15 नवम्बर को
जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा पांचवी तरही नाशिस्त का आयोजन 15 नवंबर रविवार को प्रातः 11 बजे शहीद भगत सिंह पुस्तकालय शहर सराय रतलाम पर किया जाएगा। इसमें तरही मिसरे ' दिल के दरिया में यादों की कश्ती चली' पर ग़ज़लें कहीं जाएंगी। जनवादी लेखक संघ अध्यक्ष यूसुफ़ जावेदी ने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

















