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रतलाम में जनवादी लेखक संघ की तरही गोष्ठी संपन्न, प्रो. चौहान बोले— 'हर विधा की अपनी ख़ूबसूरती और सौंदर्य'
रतलाम में जनवादी लेखक संघ की तरही गोष्ठी संपन्न, प्रो. चौहान बोले— 'हर विधा की अपनी ख़ूबसूरती और सौंदर्य'
रतलाम। जनवादी लेखक संघ (उर्दू विंग) के तत्वावधान में रतलाम में एक तरही गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने साहित्य में वैचारिक स्पष्टता और अध्ययन के महत्व पर बल दिया।
बिना मीर-ग़ालिब को पढ़े ग़ज़ल की राह कठिन: प्रो. चौहान
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रतन चौहान ने कहा कि ग़ज़ल का दायरा बेहद विस्तृत है और सोलह सौ वर्षों से अधिक के इतिहास में इसने कई पड़ाव तय किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीर और ग़ालिब हमारी ग़ज़ल परंपरा के मुख्य द्वार हैं, जिन्हें पढ़े बिना कोई अपनी शैली विकसित नहीं कर सकता। उन्होंने रचनाकारों को सलाह दी कि वे अपने पूर्ववर्तियों का अध्ययन कर अपनी अलग राह बनाएं, जिससे साहित्य समृद्ध हो सके।
रचनाकारों को मंच और दिशा देना ही उद्देश्य
कार्यक्रम के दौरान जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने रतलाम में ग़ज़लकारों की बड़ी संख्या और उनके उत्कृष्ट लेखन पर प्रसन्नता व्यक्त की। वहीं, उर्दू विंग के प्रदेश संयोजक सिद्धीक़ रतलामी ने ग़ज़ल लेखन की बारीकियों और आवश्यक बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नए व समर्पित रचनाकारों को सही दिशा और एक मजबूत मंच प्रदान करना है।
'फूलों की रहगुज़र पे चलो देखभाल के' पर हुआ काव्य पाठ
गोष्ठी के दौरान उपस्थित साहित्यकारों ने निर्धारित तरही मिसरे "फूलों की रहगुज़र पे चलो देखभाल के" पर अपनी-अपनी ग़ज़लों का पाठ किया।
काव्य पाठ करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में युसूफ़ जावेदी, कैलाश व्यास, सिद्दीक़ रतलामी, प्रतिभा पांडे, आशा श्रीवास्तव, आशीष दशोत्तर, पूजा चोपड़ा, डॉ. फ़रीद शेख, अमीरूद्दीन अमीर, शादाब रतलामी, पुष्पलता शर्मा, आशा उपाध्याय, विनोद झालानी, दिलीप जोशी, आई.एल. पुरोहित, लक्ष्मण पाठक, जी.एस. खींची, अशोक कुमार शर्मा, कीर्ति शर्मा, जितेन्द्र सिंह पथिक, हीरालाल खराड़ी, मुकेश सोनी, यू.सी. जायसवाल और कला डामोर शामिल रहे।
आगामी आयोजनों की रूपरेखा
जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने बताया कि संघ का अगला आयोजन 30 अगस्त (रविवार) को प्रातः 11 बजे भगत सिंह पुस्तकालय (शहर सराय, रतलाम) में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम कहानी विधा पर केंद्रित रहेगा, जिसमें युवा कहानीकार आशीष दशोत्तर की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'वागर्थ' में प्रकाशित बहुचर्चित कहानी 'झुरियां' का पाठ एवं उस पर परिचर्चा होगी।
इसके साथ ही, तरही नशिस्त की अगली कड़ी 13 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें रचनाकार "फूलों से ज़ख़्म खाए हैं हमने बहार में" मिसरे पर अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत करेंगे।












