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प्रदीप पालीवाल का नेत्रदान बना मानवता की प्रेरणादायक मिसाल
रतलाम। किसी अपने के चले जाने का दुःख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, लेकिन उसी कठिन समय में यदि परिवार मानवता और समाजसेवा का निर्णय ले, तो वह निर्णय दिवंगत व्यक्ति की स्मृति को हमेशा के लिए अमर बना देता है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण कस्तुरबा नगर निवासी प्रदीप पालीवाल
के आकस्मिक निधन के पश्चात परिजनों ने नेत्रदान की सहमति देकर यह संदेश दिया कि जीवन के बाद भी किसी के जीवन में उजाला दिया जा सकता है।
आशीष पालीवाल ने परिजनों को नेत्रदान की प्रेरणा दी उनके पुत्र आकाश पालीवाल, विपुल पालीवाल
एवं परिजनों ने नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान की। परिवार के इस पुनीत निर्णय से प्रदीप पालीवाल
की स्मृति समाजसेवा और मानव कल्याण से जुड़ गई।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि नेत्रदान की सहमति मिलते ही डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज, रतलाम की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई। उनके निर्देशन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में डॉ ऊषा मीणा
नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाहा ने जीवन देवड़ा के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई।
इस सेवा कार्य में नेत्रम संस्था के यशवंत पावेचा ने अपने निजी वाहन से मेडिकल टीम को दिवंगत के निवास तक पहुंचाने तथा प्रक्रिया के बाद मेडिकल कॉलेज वापस पहुंचाने की व्यवस्था की।
इस अवसर पर ओमप्रकाश अग्रवाल,शीतल भंसाली, ,
यशवंत पावेचा ,सुशील मीनू माथुर, गिरधारील वर्धानी, पारसमल वोरा, महेन्द्र गेलडा
सहित अनेक स्नेहीजन एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे।
नेत्रदान—मृत्यु के बाद भी जीवन में उजाला
प्रदीप पालीवाल के परिवार ने अपने दुःख की घड़ी में जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए प्रेरणा है। नेत्रदान केवल एक अंगदान नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में नई सुबह और नई रोशनी देने का संकल्प है।
नेत्रम संस्था ने आमजन से अपील की कि मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेकर इस महान मानवीय अभियान से जुड़ें, क्योंकि आपकी आँखें किसी की नई सुबह बन सकती हैं।














